द हरिकैन - कविता


बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं था I आज दिन में टेलीविज़न पर एक अंग्रेजी फिल्म "The Hurricane" आ रही थी I यह एक बॉक्सर "रूबल कार्टर" के जीवन पर आधारित है जिसको अदालत के गलत निर्णय के कारण उम्र कैद हो जाती है I जेल में रह कर वह अपने जीवन पर एक किताब लिखता है I उसी किताब को पढ़ कर एक लड़का बड़ा प्रभावित होता है और उस से संपर्क करता है I अपने दोस्तों की मदद से वह लड़का रूबल कार्टर को बीस बरस की कैद काट चुकने के बाद रिहा करवाने में सफल हो जता है I इसी कहानी से कुछ भाव उपजे और यह कविता बनी I कितनी सफल है यह तो आप सब की टिप्पणियों से ही पता चल पायेगा I

 मैं अपराधी नहीं परन्तु
फिर भी समय बिता रहा हूँ
ऊँची ऊँची दीवारों के बीच
अँधेरी बंद कोठरियों में
जहाँ मानवता नहीं
केवल लोहा ही पार पा सकता है
परिजनों के लिए सहारा न बन
बोझ बन गया हूँ
फिर भी मन है कि
भूल कर अपनी सारी
टूटन, थकन, लाचारी
गाहे वगाहे निकल जाता है
इन ऊंची ऊंची दीवारों से परे
लोहे की सलाखों के पार
और भर लाता है अपनी झोली
कभी पेड़ों पर छिटकी हुई धूप से
कभी दूब पर फैली चांदनी से
कभी लफ्जों के अंबार से
जो बिखर कर कागज़ पर
शायद एक दिन दुनिया के लिए
मेरी कहानी मेरी ज़ुबानी बन जायेंगे

जीवन में प्रसन्न रहने के लिए क्या करना आवश्यक है ?

अधिकतर लोग यह समझते हैं कि वह जानते हैं प्रसन्न  रहने के लिए क्या करना चाहिए I विभिन्न लोग भिन्न भिन्न कारणों को प्रसन्न रहने के लिए आवश्यक  मानते हैं I  आईये इस विषय पर और आगे बढ़ने से पहले हम यह जान लें कि मृत्यु के करीब लोगों पर किये गए सर्वेक्षण में उनके कौन से मुख्य पछतावे सामने आये ?

१.  काश मुझ में हिम्मत होती और में अपना जीवन ऐसे जिया होता जैसे मैं चाहता था ना की जैसे और लोग चाहते थे I
२.  काश मैंने इतनी ज्यादा मेहनत ना की होती I
३.  काश मुझ में अपनी भावनाओं को प्रकट करने की हिम्मत होती I
४.  काश में अपने मित्रों के संपर्क में अधिक से अधिक रहा होता I
५.  काश मैंने स्वयं को जीवन में प्रसन्न रखा होता I

यदि इन पांच पछ्तावों को उन लोगों ने  जीवन से दूर कर दिया होता तो वह अपना जीवन प्रसन्नता से व्यतीत कर पाते I

इसके लिए सबसे पहले आवश्यक है कि दूसरों की प्रसन्नता का विचार  तो सदा  रखना चाहिए परन्तु साथ ही यह भी आवशयक  है कि बदले में वो भी आपको प्रसन्नता  ही लौटायेंगे यह आशा नही रखनी चाहिए I स्वयं को प्रसन्न रखना कोई अपराध नही है यह सदा  विचार  में रखना चाहिये I

दूसरा आवश्यकता से अधिक की गयी मेहनत अथवा शरीर को अधिक कष्ट दे और स्वास्थय को नकार कर किया गया कोई भी कार्य भविष्य में प्रसन्नता का कारण नहीं 
बन सकता यह बात हमें हमेशा विचार  में रखनी चाहिये I

तीसरा आप सबसे बेहतर क्या कर सकते हैं और उसके लिए कितना समय दे सकते हैं यह आपसे अधिक दूसरा कोई नहीं जानता I वही करें जो आपको अच्छा लगता है और उसके लिए अपनी पूरी शक्ति और समय का उपयोग करें I उसी कार्य में उत्कर्षता प्राप्त करने का प्रयत्न करें जिस काम को आप करना सबसे ज्यादा पसंद करेंगे I

चौथा कमरे से बाहर निकल कर समाज और दोस्तों से मेल जोल रखना अत्यंत आवश्यक है I स्वयं पर विश्वास होना अच्छी बात है परन्तु दूसरों की राय और बातों का विश्लेष्ण भी कभी कभी बहुत फायदे का सौदा हो सकता है I नाकारात्मक बहसों से बचते हुए साकारात्मक बातचीत ऊर्जा का संचार करती है I

पांचवां पैसे और पद से अपनी तुलना दूसरों से न करें I  याद रखें एक कामयाब व्यक्ति  से ज्यादा बड़ा  होता है एक संतुष्ट व्यक्ति I


यदि आप यह सब करने में सक्षम हैं तो कोई कारण नहीं कि आप  जीवन में प्रसन्न न रह पायें I